आज ज़िन्दगी बन गई है बेबस सी
कफ़न में लेती है साँस हर वक्त
किसी दस्तक से कॉप ऊड़ती है रुहू
किसी आहट से सहम जाती है ज़िन्दगी
जीने की चाहः बान कर रह गई है ज़िन्दगी
पर नही जीना है खौफ में
गुलामियत की फितरत से परे चलो
आज़ादी का जशन बनाना चाहती है ज़िन्दगी
ये सपने है ग्हुलामो के
जो बुन कर रखे है बेडीयो में
पंख देना चाहते है सपनों को
साहस देना चाहते है उमीद्हो को
तोड़ कर उडा दो ईन को
डर में जी नही पायेगी ज़िन्दगी
उम्मीद की डोर से उदो ले चलो जिन्दगो